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पटना/बिहार:
बिहार सरकार ने राज्य में उच्च शिक्षा को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की घोषणा की है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है कि जिन लोगों द्वारा डिग्री कॉलेज की स्थापना के लिए जमीन दान की जाएगी, उनके सम्मान में कॉलेज या उसके किसी हिस्से का नामकरण किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च शिक्षा के अवसरों का विस्तार करना और छात्रों को अपने क्षेत्र में ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य के ऐसे 211 प्रखंड, जहां अब तक कोई डिग्री कॉलेज नहीं है, वहां आगामी 1 जुलाई से स्नातक स्तर की पढ़ाई शुरू कराने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए आवश्यक शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों के हजारों विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए दूसरे शहरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता सुधार भी सरकार की प्राथमिकता है। इसी दिशा में बिहार के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को देश के शीर्ष 10 विश्वविद्यालयों से जोड़ने की योजना बनाई जा रही है। इसके लिए विभिन्न संस्थानों के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर काम चल रहा है। इस पहल के माध्यम से बिहार के विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक संसाधन, शोध के अवसर और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों का लाभ मिलेगा।
सरकार का यह कदम शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी पहल माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में डिग्री कॉलेजों की स्थापना से न केवल शिक्षा का स्तर बेहतर होगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और सामाजिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। जमीन दानदाताओं को सम्मान देने की नीति से समाज के लोग भी शिक्षा के विकास में सक्रिय भागीदारी निभाने के लिए प्रेरित होंगे।
राज्य सरकार का लक्ष्य है कि बिहार का कोई भी छात्र उच्च शिक्षा से वंचित न रहे और उसे अपने क्षेत्र में ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो सके। इसी सोच के साथ सरकार शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और नए संस्थानों की स्थापना की दिशा में तेजी से काम कर रही

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