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11 जून 2026, पटना/बिहार:
भीषण गर्मी और लू की मार झेल रहे बिहारवासियों के लिए राहत भरी खबर है। दक्षिण-पश्चिम मानसून ने इस वर्ष निर्धारित समय से लगभग छह दिन पहले बिहार में दस्तक दे दी है। मानसून के आगमन के साथ ही राज्य के कई जिलों में झमाझम बारिश शुरू हो गई है, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई है और लोगों को गर्मी से राहत मिली है। वहीं, किसानों के लिए भी यह खबर किसी वरदान से कम नहीं है, क्योंकि समय पर हुई बारिश खरीफ फसलों की तैयारी में मददगार साबित होगी।
मौसम विज्ञान केंद्र पटना के वरिष्ठ वैज्ञानिक आशीष कुमार के अनुसार, मानसून की उत्तरी सीमा (एनएलएम) वर्तमान में मधुबनी से होकर गुजर रही है। इसके साथ ही बिहार के सात जिलों—किशनगंज, अररिया, सुपौल, पूर्णिया, कटिहार, मधेपुरा और मधुबनी—में मानसून आधिकारिक रूप से प्रवेश कर चुका है। इन क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ अच्छी बारिश दर्ज की गई है, जिससे मौसम पूरी तरह बदल गया है।
पिछले 24 घंटे में कई जिलों में भारी बारिश
मानसून के प्रभाव से सीमांचल और उत्तर बिहार के कई इलाकों में जोरदार वर्षा हुई है। मौसम विभाग के अनुसार, सबसे अधिक 148.0 मिलीमीटर बारिश किशनगंज के तैयबपुर में दर्ज की गई। इसके अलावा सुपौल के सरायगढ़ भपटियाही में 106.0 मिमी, खगड़िया के बलतारा में 70.4 मिमी, समस्तीपुर के हसनपुर में 67.6 मिमी, सीवान के आंदर में 67.4 मिमी तथा पश्चिमी चंपारण के वाल्मीकिनगर में 58.0 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई है।
लगातार हुई बारिश के कारण तापमान में उल्लेखनीय गिरावट आई है और कई इलाकों में लोगों ने गर्मी से राहत की सांस ली है। पिछले कुछ दिनों से राज्य के अधिकांश हिस्सों में तापमान 40 से 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था।
अगले 72 घंटों में पूरे बिहार में सक्रिय होगा मानसून
मौसम विभाग का कहना है कि मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल हैं। अनुमान है कि अगले 48 से 72 घंटों के भीतर मानसून पूरे बिहार में फैल जाएगा। विभाग ने पटना, गया, मुजफ्फरपुर, भागलपुर, सारण समेत राज्य के अन्य जिलों में भी बारिश की संभावना जताई है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, आगामी तीन दिनों में कई जिलों में मध्यम से भारी वर्षा हो सकती है। इसके साथ ही तेज हवाएं चलने और तापमान में और गिरावट आने की संभावना है।
किसानों के चेहरे पर लौटी मुस्कान
मानसून के समय से पहले पहुंचने से किसानों को सबसे अधिक लाभ मिलने की उम्मीद है। धान की खेती के लिए जून का महीना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। समय पर बारिश होने से धान की नर्सरी तैयार करने, खेतों की जुताई और रोपाई के कार्य में तेजी आएगी। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बारिश का सिलसिला जारी रहा तो इस वर्ष खरीफ फसलों का उत्पादन बेहतर हो सकता है।
गर्मी से मिली राहत
लगातार पड़ रही भीषण गर्मी और लू के कारण जनजीवन प्रभावित हो रहा था। कई जिलों में स्कूलों के समय में बदलाव किया गया था और लोगों को दोपहर में घरों से बाहर नहीं निकलने की सलाह दी जा रही थी। मानसून की पहली बारिश के बाद मौसम सुहावना हो गया है और लोगों ने राहत महसूस की है।
बिहार में मानसून की समय से पहले एंट्री को मौसम वैज्ञानिक एक सकारात्मक संकेत मान रहे हैं। यदि आगामी दिनों में मानसून सामान्य गति से आगे बढ़ता है तो राज्य में कृषि, जल संसाधन और जनजीवन पर इसका व्यापक सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा।

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