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नौहट्टा - कातुदाढ़ डैम की बदहाली से किसानों में आक्रोश, नदी पर अतिक्रमण से 2000 एकड़ सिंचाई प्रभावितl


 (वर्षों से जर्जर पड़ा डैम,सर्वेक्षित नदी में अतिक्रमण का आरोप)

खबर:Tahalka Aawaz आपकी आवाजl 

संवादाता- मुकेश कुमार मिश्रा/नौहट्टा/रोहतास:

नौहट्टा प्रखंड की तिउरा पंचायत अंतर्गत चुटिया कातुदाढ़ स्थित सिंचाई डैम की बदहाली और उससे जुड़ी सर्वेक्षित नदी पर कथित अतिक्रमण को लेकर क्षेत्र के किसानों में भारी आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से जर्जर पड़े इस डैम की ओर प्रशासन का कोई ध्यान नहीं है। वहीं, डैम से जुड़ी सर्वेक्षित नदी के कुछ हिस्सों को मिट्टी भरकर खेती योग्य बना दिया गया है, जिससे नदी का प्राकृतिक जल प्रवाह बाधित हो गया है। इसका सीधा असर आसपास के लगभग 2000 एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई पर पड़ रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि एक समय कातुदाढ़ डैम से पूरे इलाके की कृषि व्यवस्था की रीढ़ माना जाता था। डैम में पर्याप्त पानी रहने से आसपास के गांवों के किसान आसानी से धान, गेहूं, दलहन और सब्जियों की खेती करते थे। लेकिन वर्षों से डैम की मरम्मत नहीं होने, गहराई भर जाने और नदी पर अतिक्रमण होने के कारण अब सिंचाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।

किसानों के अनुसार, नदी में मिट्टी भरने और अतिक्रमण के कारण पानी का बहाव रुक गया है। बरसात का पानी भी पहले की तरह खेतों तक नहीं पहुंच पाता, जिससे खेती प्रभावित हो रही है। कई किसानों को निजी संसाधनों से सिंचाई करनी पड़ रही है, जिससे खेती की लागत बढ़ गई है और आर्थिक बोझ भी बढ़ता जा रहा है।

ग्रामीणों ने बताया कि इस समस्या को लेकर कई बार संबंधित विभाग के अधिकारियों एवं स्थानीय प्रशासन को लिखित और मौखिक रूप से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक न तो नदी की सफाई कराई गई और न ही अतिक्रमण हटाने की कोई प्रभावी कार्रवाई हुई। इससे किसानों में प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है।

किसान अखिलेश मिश्रा, ब्रजेश मिश्रा, हरिशंकर मिश्रा, सत्यनारायण मिश्रा एवं रामचंदर विश्वकर्मा ने प्रशासन से मांग की है कि कातुदाढ़ डैम का शीघ्र जीर्णोद्धार कराया जाए, डैम से जुड़ी सर्वेक्षित नदी की सफाई कराकर अतिक्रमण हटाया जाए तथा सिंचाई व्यवस्था को पुनः बहाल किया जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में हजारों किसानों के सामने खेती का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। उनका कहना है कि कातुदाढ़ डैम और उससे जुड़ी नदी का संरक्षण केवल किसानों की आजीविका का ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की कृषि और जल संसाधन व्यवस्था के संरक्षण का भी महत्वपूर्ण विषय है। किसानों ने प्रशासन से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर स्थायी समाधान सुनिश्चित करने की मांग की है।

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