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चीफ एडिटर- रवि प्रकाश दुबे/सासाराम/ रोहतास:
करीब 14 वर्षों से बंद पड़े रोहतास जिले के पत्थर उद्योग को फिर से शुरू करने की दिशा में जिला प्रशासन ने बड़ी पहल की है। राज्य सरकार के निर्देश पर करवंदिया पहाड़ी स्थित बंद खनन क्षेत्र की मापी और सीमांकन की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। प्रशासन ने इस कार्य के लिए जिले के विभिन्न अंचलों से सात अमीनों की प्रतिनियुक्ति की है। माना जा रहा है कि सीमांकन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद खदानों के बंदोबस्त की कार्रवाई आगे बढ़ेगी और लंबे समय से ठप पड़ा पत्थर उद्योग एक बार फिर शुरू हो सकेगा।
यदि सभी प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाएं समय पर पूरी होती हैं, तो रोहतास में वर्षों बाद फिर से क्रशर मशीनों की आवाज सुनाई देगी और हजारों लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
सात अमीनों की हुई प्रतिनियुक्ति
अपर समाहर्ता (राजस्व) ललित भूषण रंजन द्वारा जारी आदेश के अनुसार करवंदिया पहाड़ी के सीमांकन कार्य को समयबद्ध ढंग से पूरा करने के लिए सात अंचल अमीनों की प्रतिनियुक्ति सासाराम सदर अंचल में की गई है।
प्रतिनियुक्त अमीनों में—
सासाराम के विक्की कुमार
करगहर के विकास कुमार
नोखा के संजीव कुमार
संझौली के आदित्य कुमार
डेहरी के मोहम्मद इमरान
अकोढ़ीगोला के विकास कुमार
तिलौथू के इम्तियाज अहमद
शामिल हैं।
सीओ और खनिज विभाग को मिला जिम्मा
एडीएम (राजस्व) ने सासाराम सदर अंचलाधिकारी को निर्देश दिया है कि जिला खनिज विकास पदाधिकारी के साथ समन्वय स्थापित कर सीमांकन कार्य तत्काल शुरू कराया जाए। साथ ही प्रतिदिन कार्य की प्रगति रिपोर्ट जिला पदाधिकारी को उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया गया है, ताकि प्रक्रिया में किसी प्रकार की देरी न हो।
2012 में बंद हुआ था पूरा उद्योग
गौरतलब है कि जून 2012 में अवैध खनन पर रोक लगाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने करवंदिया पहाड़ी क्षेत्र को खनन मुक्त घोषित कर दिया था। इसके बाद पत्थर की आपूर्ति पूरी तरह बंद हो गई और जिले में संचालित लगभग 400 क्रशर मशीनों के लाइसेंस धीरे-धीरे निरस्त कर दिए गए।
इसके परिणामस्वरूप रोहतास का पत्थर उद्योग पूरी तरह ठप पड़ गया। हजारों मजदूर, ट्रांसपोर्टर, मशीन ऑपरेटर, ठेकेदार और छोटे व्यवसायी बेरोजगार हो गए तथा जिले की अर्थव्यवस्था पर भी इसका व्यापक असर पड़ा।
रोजगार और अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई गति
अब सीमांकन की प्रक्रिया शुरू होने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही खदानों के बंदोबस्त की प्रक्रिया भी प्रारंभ होगी। यदि सरकार नियमों के तहत खनन और क्रशर संचालन की अनुमति देती है, तो हजारों लोगों को दोबारा रोजगार मिलेगा।
पत्थर उद्योग के पुनः शुरू होने से ट्रांसपोर्ट, मशीनरी, होटल, ढाबा, ऑटोमोबाइल, डीजल कारोबार सहित कई अन्य व्यवसायों को भी नया जीवन मिलेगा। इससे रोहतास जिले की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
व्यवसायियों और मजदूरों में जगी उम्मीद
पत्थर उद्योग से जुड़े व्यवसायियों और मजदूरों की निगाहें अब जिला प्रशासन और राज्य सरकार के अगले फैसले पर टिकी हैं। उनका कहना है कि यदि सभी औपचारिकताएं पूरी कर खनन की अनुमति मिल जाती है, तो रोहतास एक बार फिर बिहार के प्रमुख पत्थर उत्पादन क्षेत्रों में अपनी पहचान बना सकेगा।
नियमों के तहत होगी आगे की कार्रवाई
जिला प्रशासन का कहना है कि सीमांकन का कार्य पूरी पारदर्शिता और निर्धारित नियमों के अनुरूप कराया जाएगा। मापी पूरी होने के बाद राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार आगे की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
करीब डेढ़ दशक बाद पत्थर उद्योग को पुनर्जीवित करने की इस पहल से रोहतास जिले के लोगों में नई उम्मीद जगी है। यदि सभी प्रक्रियाएं समय पर पूरी हो जाती हैं, तो आने वाले दिनों में करवंदिया क्षेत्र एक बार फिर खनन और क्रशर उद्योग की गतिविधियों से गुलजार हो सकता है।

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