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मनीष कुमार/दरिहट/रोहतास:
दरिहट में आयोजित भव्य रुद्र महायज्ञ में उस समय आध्यात्मिक वातावरण और अधिक भक्तिमय हो गया, जब श्री त्रिदंडी स्वामी जी महाराज के परम शिष्य, तपोमूर्ति संत श्री सुंदर राज स्वामी यतिराज स्वामी जी महाराज का यज्ञ स्थल पर आगमन हुआ। उनके आगमन से पूरे यज्ञ परिसर में श्रद्धा, भक्ति और उत्साह का माहौल बन गया। श्रद्धालुओं ने संत का भव्य स्वागत किया तथा उनके दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग यज्ञ पंडाल में पहुंच गए।
संत श्री सुंदर राज स्वामी जी महाराज ने यज्ञ पंडाल में उपस्थित श्रद्धालुओं को अपने अमृतमय प्रवचनों से आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान किया। उन्होंने कहा कि मानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य ईश्वर की भक्ति, सत्कर्म और समाज की सेवा है। धर्म के मार्ग पर चलकर ही व्यक्ति जीवन को सार्थक बना सकता है। उन्होंने लोगों से आपसी प्रेम, सद्भाव और संस्कारों को अपनाने का आह्वान किया।
स्वामी जी की ओजस्वी वाणी को सुनने के लिए हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ यज्ञ पंडाल में उमड़ पड़ी। प्रवचन के दौरान पूरा पंडाल श्रद्धालुओं से खचाखच भरा रहा। दूर-दराज के गांवों और शहरों से आए भक्तगण बड़े ध्यानपूर्वक संत की वाणी का श्रवण करते रहे। कई श्रद्धालुओं ने इसे अपने जीवन का सौभाग्य बताते हुए कहा कि संतों के सान्निध्य और उनके उपदेशों से मन को शांति एवं नई ऊर्जा प्राप्त होती है।
यज्ञ समिति के सदस्यों ने बताया कि रुद्र महायज्ञ के दौरान प्रतिदिन धार्मिक अनुष्ठान, हवन-पूजन, कथा एवं संतों के प्रवचन का आयोजन किया जा रहा है, जिससे क्षेत्र का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना हुआ है। संत श्री सुंदर राज स्वामी जी महाराज के आगमन से यज्ञ की गरिमा और बढ़ गई है।
कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं ने संत श्री के दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया और यज्ञ की सफलता तथा क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की। पूरे आयोजन के दौरान भक्तों में गहरा उत्साह और आस्था देखने को मिली।

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