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जयपुर पटाखा फैक्ट्री अग्निकांड: रूह कंपा देने वाला मंजर, 4 मजदूरों की दर्दनाक मौत, कई जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहेl

 

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विशेष संवादाता/जयपुर/राजस्थान:

राजस्थान की राजधानी जयपुर के खो नागोरियान क्षेत्र में मंगलवार को हुए भीषण पटाखा फैक्ट्री अग्निकांड ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया। एक अवैध रूप से संचालित पटाखा फैक्ट्री में अचानक लगी आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया और चार श्रमिकों की दर्दनाक मौत हो गई। वहीं कई अन्य मजदूर गंभीर रूप से झुलस गए हैं, जिनमें कुछ की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दोपहर के समय फैक्ट्री से अचानक धुआं उठने लगा और कुछ ही क्षणों में बारूद ने आग पकड़ ली। आग इतनी तेजी से फैली कि अंदर काम कर रहे मजदूरों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। फैक्ट्री परिसर में लगातार छोटे-बड़े धमाके होते रहे, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

दिल दहला देने वाला था घटनास्थल का दृश्य

हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में चीख-पुकार मच गई। आसमान में काले धुएं का गुबार छा गया और रह-रहकर हो रहे धमाकों ने लोगों में दहशत फैला दी। दमकल विभाग और सिविल डिफेंस की टीमों ने मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया, लेकिन आग की तीव्रता के कारण अभियान काफी चुनौतीपूर्ण रहा।

जब बचाव दल ने मलबा हटाना शुरू किया तो कई मजदूर गंभीर हालत में मिले, जबकि चार लोगों के शव बरामद किए गए। मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। अपने प्रियजनों की तलाश में अस्पतालों और घटनास्थल के बीच भटकते परिवारों की आंखों में सिर्फ दर्द और बेबसी दिखाई दे रही थी।

अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग

घायलों को तत्काल जयपुर के सवाई मानसिंह (एसएमएस) अस्पताल पहुंचाया गया। डॉक्टरों के अनुसार कई श्रमिक 70 से 80 प्रतिशत तक झुलस चुके हैं। कुछ मरीजों के फेफड़ों में धुएं का गंभीर असर पड़ा है, जिसके कारण उनकी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

अस्पताल प्रशासन ने बर्न एवं प्लास्टिक सर्जरी विभाग के विशेषज्ञ चिकित्सकों की विशेष टीम गठित कर दी है, जो लगातार घायलों की निगरानी कर रही है। आईसीयू के बाहर बैठे परिजनों की निगाहें हर पल डॉक्टरों की ओर टिकी हुई हैं।

गरीब परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़

मृतक और घायल अधिकांश श्रमिक आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से थे। रोजाना मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करने वाले ये लोग सुबह काम पर निकले थे, लेकिन शाम तक कई परिवारों के घरों के चिराग बुझ गए।

इस हादसे ने उन परिवारों को गहरे संकट में डाल दिया है, जिनकी आजीविका पूरी तरह इन मजदूरों पर निर्भर थी। कई घरों में मातम पसरा हुआ है और परिजन अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं।

प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल

हादसे के बाद प्रशासन और संबंधित विभागों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि रिहायशी इलाके में लंबे समय से बिना पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था और आवश्यक अनुमति के पटाखा निर्माण का कार्य चल रहा था।

लोगों का कहना है कि यदि समय रहते फैक्ट्री का निरीक्षण कर सुरक्षा मानकों की जांच की गई होती तो इतनी बड़ी जनहानि टाली जा सकती थी। फिलहाल पुलिस ने फैक्ट्री संचालकों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

जवाब मांग रहा है यह हादसा

खो नागोरियान का यह दर्दनाक हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सुरक्षा नियमों की अनदेखी का गंभीर परिणाम माना जा रहा है। चार परिवारों ने अपने कमाऊ सदस्यों को खो दिया है, जबकि कई अन्य परिवार अभी भी अस्पतालों में अपने प्रियजनों की जिंदगी बचने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर घनी आबादी वाले क्षेत्रों में ऐसे खतरनाक और अवैध कारोबार कब तक चलते रहेंगे और प्रशासन कब तक केवल हादसों के बाद जागेगा?

(नोट: किसी भी दुर्घटना से संबंधित मृतकों और घायलों की संख्या समय के साथ बदल सकती है। अंतिम आधिकारिक आंकड़े प्रशासनिक पुष्टि के अनुसार ही माने जाएं।)

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