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नौहट्टा- खुखमा घाटी का रास्ता जर्जर, वीरान हुआ कभी गुलजार रहने वाला चुटिया का ऐतिहासिक साप्ताहिक बाजारl


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 चीफ एडिटर- रवि प्रकाश दुबे/नौहट्टा/रोहतास्त:

चुटिया (नौहट्टा) एक समय पूरे क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा चुटिया का साप्ताहिक बाजार आज अपनी पहचान बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है। कभी यहां हर रविवार को लगने वाला बाजार हजारों लोगों की चहल-पहल से गुलजार रहता था, लेकिन आवागमन की गंभीर समस्या और खुखमा घाटी के रास्ते के जर्जर हो जाने के कारण अब यह बाजार लगभग वीरान हो चुका है।

स्थानीय लोगों के अनुसार करीब सात वर्ष पूर्व तक यह साप्ताहिक बाजार नियमित रूप से लगता था। यह बाजार नौहट्टा प्रखंड के सबसे पुराने और प्रसिद्ध बाजारों में से एक माना जाता था। रविवार के दिन आसपास के गांवों के अलावा पहाड़ी क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग यहां खरीदारी और व्यापार के लिए पहुंचते थे।

खुखमा, सलमा, सलया, आथन, बरकट्ठा समेत पहाड़ी इलाकों के ग्रामीण कम से कम 20 घोड़ा-ट्रैक्टर तथा सैकड़ों लोगों के साथ खुखमा घाटी के रास्ते पैदल चलकर बाजार आते थे। ग्रामीण अपने साथ सरसों, गेहूं, चना, मकई सहित अन्य कृषि उत्पाद और वन उपज लेकर आते थे तथा उन्हें बेचकर बदले में हरी सब्जियां, कपड़े और घरेलू जरूरत का सामान खरीदते थे।

चुटिया बाजार की ख्याति इतनी थी कि सोन नदी पार कर झारखंड से भी व्यापारी यहां अपना सामान बेचने आते थे। उस दौर में इस बाजार की चर्चा पूरे क्षेत्र में होती थी और यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत कड़ी माना जाता था।

ग्राहकों और व्यापारियों की सुविधा के लिए सरकार द्वारा बाजार परिसर में धूप और बारिश से बचाव हेतु शेड का निर्माण भी कराया गया था। लेकिन समय के साथ खुखमा घाटी का रास्ता खराब होता चला गया और पहाड़ी गांवों से आने-जाने में कठिनाई बढ़ गई। परिणामस्वरूप पहाड़ी क्षेत्रों के लोगों का बाजार में आना लगभग बंद हो गया। चूंकि बाजार की सबसे अधिक भीड़ इन्हीं गांवों के लोगों की होती थी, इसलिए उनके नहीं आने से बाजार की रौनक पूरी तरह समाप्त हो गई।

स्थानीय दुकानदार राजेश्वर चन्द्रवंशी, संजय प्रसाद गुप्ता, धर्मात्मा सिंह, श्याम नारायण प्रसाद, शिव रतन सिंह, अनिल प्रसाद गुप्ता एवं रामचंद्र साव ने बताया कि बाजार बंद होने से दुकानदारों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। पहले जहां हर सप्ताह अच्छी बिक्री होती थी, वहीं अब अधिकांश दुकानें ग्राहकों के इंतजार में सूनी पड़ी रहती हैं।

दुकानदारों और ग्रामीणों का कहना है कि यदि खुखमा घाटी का रास्ता फिर से बनाकर आवागमन सुगम कर दिया जाए तो पहाड़ी गांवों के लोग दोबारा बाजार तक पहुंच सकेंगे और चुटिया का ऐतिहासिक साप्ताहिक बाजार एक बार फिर अपनी पुरानी पहचान और रौनक हासिल कर सकेगा।

ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से खुखमा घाटी सड़क के निर्माण की मांग करते हुए कहा है कि यह सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि क्षेत्र की अर्थव्यवस्था और हजारों लोगों की आजीविका से जुड़ा महत्वपूर्ण मार्ग है। सड़क बनने से बाजार के साथ-साथ पहाड़ी क्षेत्रों के लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य सुविधाओं तक पहुंचने में भी काफी सहूलियत मिलेगी।

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