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रामू सिंह/डेहरी/रोहतास:
डेहरी विद्युत प्रमंडल अंतर्गत आयरकोठा क्षेत्र के पड़ुहार गांव में बिना वैध विद्युत कनेक्शन के वर्षों से राइस मिल संचालन के मामले ने विद्युत विभाग में हड़कंप मचा दिया है। प्रारंभिक जांच में विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की कथित मिलीभगत सामने आने के बाद कई अधिकारियों पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है। मामले को लेकर भ्रष्टाचार उजागर मंच और आरटीआई कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री, ऊर्जा मंत्री तथा ऊर्जा विभाग के प्रधान सचिव को ई-मेल के माध्यम से शिकायत भेजने की तैयारी कर ली है।
तीन वर्षों से चल रहा था खेल
सूत्रों के अनुसार पड़ुहार स्थित एक राइस मिल को बिना किसी वैध विद्युत कनेक्शन के बिजली आपूर्ति की जा रही थी। हैरत की बात यह है कि मिल परिसर तक बिजली पहुंचाने के लिए ट्रांसफार्मर स्थापित किया गया, विद्युत पोल लगाए गए तथा तार भी खींचे गए। इतने बड़े स्तर पर किए गए कार्य बिना विभागीय अनुमति और अधिकारियों की जानकारी के संभव नहीं माने जा रहे हैं।
बताया जा रहा है कि यह पूरा खेल लगभग तीन वर्षों से चल रहा था और स्थानीय स्तर के अधिकारियों की कथित मिलीभगत के कारण मामला दबा रहा।
बाहरी टीम की छापेमारी में हुआ खुलासा
मामले का खुलासा तब हुआ जब विभाग की बाहरी जांच टीम ने छापेमारी की। जांच के दौरान राइस मिल में बिना वैध कनेक्शन के बिजली उपयोग का मामला सामने आया। टीम ने विद्युत चोरी और अवैध उपयोग के आरोप में राइस मिल संचालक पर एक करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया।
छापेमारी के बाद विभाग के भीतर भी हलचल तेज हो गई है। अब यह सवाल उठ रहा है कि जब बिना कनेक्शन के ट्रांसफार्मर, पोल और तार लगाए गए तो इसकी अनुमति किसने दी और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारी कौन हैं।
अधिकारियों की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल
भ्रष्टाचार उजागर मंच के प्रतिनिधियों का कहना है कि यदि किसी उपभोक्ता के नाम पर कोई वैध कनेक्शन नहीं था, तो फिर विभागीय संसाधनों का उपयोग कैसे किया गया। ट्रांसफार्मर लगाने, पोल खड़ा करने और बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में विभाग के कई अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
मंच का आरोप है कि पूरे मामले में केवल मिल संचालक को दोषी ठहराना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उन अधिकारियों की जवाबदेही भी तय करनी होगी जिनकी निगरानी में यह सब होता रहा।
मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री को भेजी जाएगी शिकायत
आरटीआई कार्यकर्ताओं ने घोषणा की है कि बुधवार को मुख्यमंत्री, ऊर्जा मंत्री तथा ऊर्जा विभाग के प्रधान सचिव को विस्तृत शिकायत भेजी जाएगी। शिकायत में पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराने, दोषी अधिकारियों को तत्काल निलंबित करने तथा दोष सिद्ध होने पर सेवा से बर्खास्त करने की मांग की जाएगी।
बचाव की मुद्रा में विभागीय अधिकारी
मामला सामने आने के बाद विद्युत विभाग के कई अधिकारी बचाव की मुद्रा में नजर आ रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि जांच का दायरा बढ़ने पर केवल स्थानीय कर्मियों ही नहीं, बल्कि उच्च स्तर के अधिकारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में आ सकती है। अधीक्षण अभियंता से लेकर कार्यपालक अभियंता तक की जिम्मेदारी और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
प्रतिदिन खुल सकती हैं नई परतें
जानकारों का मानना है कि यह मामला केवल एक राइस मिल तक सीमित नहीं हो सकता। जांच आगे बढ़ने पर विभाग में व्याप्त अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की अन्य परतें भी सामने आ सकती हैं। फिलहाल पूरे मामले पर क्षेत्र की जनता और सामाजिक संगठनों की नजर बनी हुई है।
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विभागीय जांच में किन-किन अधिकारियों की भूमिका सामने आती है और सरकार इस गंभीर मामले में क्या कार्रवाई करती है।

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