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विशेष संवादाता- आंध्रप्रदेश/(नई दिल्ली):
भारत के खनन क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। करीब 23 वर्षों के बाद देश में दूसरी सक्रिय गोल्ड माइन (सोने की खान) से उत्पादन शुरू हो गया है। आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले स्थित जोन्नागिरी गोल्ड प्रोजेक्ट से व्यावसायिक रूप से सोने का उत्पादन शुरू हो गया है। यह देश की पहली निजी क्षेत्र की सक्रिय सोने की खान भी है। पहले वर्ष यहां से लगभग 400 किलोग्राम सोने के उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है, जिसे आने वाले वर्षों में बढ़ाकर दो टन प्रतिवर्ष तक पहुंचाने की योजना है।
इस परियोजना का उद्घाटन आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने किया। इससे राज्य को आर्थिक लाभ मिलने के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
23 साल बाद फिर शुरू हुआ नया स्वर्ण उत्पादन
भारत में अभी तक केवल कर्नाटक की हट्टी गोल्ड माइन्स से ही व्यावसायिक स्तर पर सोने का उत्पादन हो रहा था। देश की प्रसिद्ध कोलार गोल्ड फील्ड (केजीएफ) वर्ष 2001 में बंद हो गई थी। इसके बाद पहली बार किसी नई सोने की खान से उत्पादन शुरू हुआ है।
जोन्नागिरी गोल्ड प्रोजेक्ट के शुरू होने से भारत के घरेलू स्वर्ण उत्पादन को मजबूती मिलेगी और आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
पहले साल 400 किलो, आगे 2 टन उत्पादन का लक्ष्य
परियोजना के पहले चरण में लगभग 400 किलोग्राम सोने का उत्पादन किया जाएगा। भविष्य में उत्पादन क्षमता बढ़ाकर दो टन प्रतिवर्ष करने की योजना बनाई गई है। बताया जा रहा है कि इस खान से निकलने वाला सोना भारत के कुल घरेलू उत्पादन का लगभग 20 प्रतिशत तक योगदान दे सकता है।
राज्य सरकार को मिलेगी करोड़ों की रॉयल्टी
जोन्नागिरी गोल्ड प्रोजेक्ट से आंध्र प्रदेश सरकार को भी बड़ा आर्थिक लाभ होगा।
400 किलोग्राम उत्पादन पर लगभग 57 करोड़ रुपये प्रति वर्ष रॉयल्टी मिलेगी।
उत्पादन 900 किलोग्राम होने पर यह राशि बढ़कर करीब 144 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।
सरकार को सोने के कुल मूल्य का 4 प्रतिशत रॉयल्टी प्राप्त होगी।
700 लोगों को मिलेगा रोजगार
इस परियोजना से लगभग 700 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। खनन, परिवहन, मशीन संचालन और अन्य सहायक सेवाओं में भी रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
पहली निजी सक्रिय गोल्ड माइन
जोन्नागिरी गोल्ड प्रोजेक्ट करीब 1500 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है। पहले चरण में लगभग 600 एकड़ क्षेत्र में उत्पादन शुरू किया गया है। यहां लगभग 13.1 टन प्रमाणित सोने का भंडार मौजूद है।
इस परियोजना का संचालन जियोमैसूर सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, डेक्कन गोल्ड माइंस लिमिटेड और त्रिवेणी अर्थमूवर्स की साझेदारी में किया जा रहा है।
सम्राट अशोक के समय भी होता था सोने का खनन
इतिहासकारों के अनुसार जोन्नागिरी क्षेत्र में ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी में सम्राट अशोक के शासनकाल के दौरान भी सोने का खनन किया जाता था। पास के एर्रागुडी गांव में मिले मौर्यकालीन शिलालेख इस ऐतिहासिक तथ्य की पुष्टि करते हैं।
एक टन अयस्क से कितना निकलता है सोना?
सोने की खदानों से धातु निकालने के लिए बड़ी मात्रा में चट्टानों और अयस्क की खुदाई की जाती है।
सामान्यतः एक टन अयस्क से 1 से 6 ग्राम तक सोना प्राप्त होता है।
उच्च गुणवत्ता वाली खदानों में 10 से 40 ग्राम तक सोना भी निकल सकता है।
राजस्थान में भी मिला बड़ा स्वर्ण भंडार
आंध्र प्रदेश के अलावा राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में भी बड़े स्वर्ण भंडार की पहचान की गई है। वर्ष 2024 में जगपुरा-भूकिया क्षेत्र की पहली छोटी स्वर्ण खदान की नीलामी की गई। यहां लगभग 9.4 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में 222.39 टन सोने के भंडार होने का अनुमान लगाया गया है।
मुख्य बातें
23 साल बाद भारत को दूसरी सक्रिय गोल्ड माइन मिली।
आंध्र प्रदेश के जोन्नागिरी से शुरू हुआ सोने का उत्पादन।
पहले वर्ष 400 किलोग्राम और भविष्य में 2 टन वार्षिक उत्पादन का लक्ष्य।
700 लोगों को मिलेगा प्रत्यक्ष रोजगार।
राज्य सरकार को हर साल करोड़ों रुपये की रॉयल्टी।
यह भारत की पहली निजी क्षेत्र की सक्रिय सोने की खान है।

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