अपने प्रशासनिक करियर की शुरुआत उन्होंने ASP, दानापुर के रूप में की। बाद में पटना में नगर पुलिस अधीक्षक रहते हुए उन्होंने लंबित मामलों के निष्पादन, पारदर्शी पुलिसिंग और पुलिस-पब्लिक संवाद को मजबूत करने के लिए व्यापक अभियान चलाया। कम्प्यूटरीकृत मॉनिटरिंग व्यवस्था लागू करने और नियमित संवाद स्थापित करने से अपराध के आंकड़ों में उल्लेखनीय कमी आई तथा पटना पुलिस की छवि और कार्यशैली में सुधार देखा गया।
बगहा में पुलिस अधीक्षक के रूप में उनका कार्यकाल विशेष रूप से चर्चित रहा। उस समय यह क्षेत्र अपहरण और डकैत गिरोहों के कारण “मिनी चंबल” के नाम से कुख्यात था। लगातार अभियानों और कठोर कार्रवाई के परिणामस्वरूप अपहरण की घटनाएँ लगभग समाप्त हो गईं तथा कई बड़े डकैत गिरोहों ने आत्मसमर्पण किया। स्थानीय लोगों के बीच उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जाता है कि वहाँ एक चौराहे का नाम “विकास वैभव चौराहा” और एक सड़क का नाम “विकास वैभव पथ” रखा गया।
रोहतास में पुलिस अधीक्षक रहते हुए उन्होंने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में “ऑपरेशन विध्वंस” जैसे अभियानों का नेतृत्व किया। सामुदायिक पुलिसिंग और “सोन महोत्सव” जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से आदिवासी एवं वंचित समुदायों में विश्वास बहाली का प्रयास किया गया। उनके नेतृत्व में दशकों बाद पर गणतंत्र दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया। उनके सख्त प्रशासनिक दृष्टिकोण के कारण कई उग्रवादियों और अपराधियों ने आत्मसमर्पण किया तथा दुर्गम क्षेत्रों में शांतिपूर्ण मतदान संभव हो सका।
राष्ट्रीय स्तर पर भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा। (NIA) में पुलिस अधीक्षक रहते हुए उन्होंने इंडियन मुजाहिदीन से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामलों की जांच का नेतृत्व किया। यासीन भटकल समेत कई आतंकवादियों की गिरफ्तारी और पूछताछ में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही। और मामलों की जांच में भी उनकी टीम को सफलता मिली तथा अभियुक्तों को न्यायालय से सजा दिलाई गई।
पटना के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) के रूप में उन्होंने कानून व्यवस्था को लेकर सख्त और सक्रिय प्रशासनिक शैली अपनाई। उन्होंने कानून के समक्ष सभी नागरिकों को समान मानते हुए निर्भीकता से विधिसम्मत कार्रवाई की। चाहे बड़े राजनीतिक व्यक्तियों पर कार्रवाई का प्रश्न हो या बाहुबली माने जाने वाले अपराधियों की गिरफ्तारी का मामला, उन्होंने कानून का राज स्थापित करने में दृढ़ता दिखाई। वर्ष 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान स्वतंत्र, निष्पक्ष और भयमुक्त मतदान सुनिश्चित कराने में भी उनकी भूमिका उल्लेखनीय मानी गई।
भागलपुर क्षेत्र के डीआईजी के रूप में उन्होंने “जनता दरबार” और “लोक संवाद गोष्ठियों” जैसी पहल शुरू कीं, जिनसे आम नागरिक सीधे पुलिस प्रशासन से जुड़ सके। भ्रष्टाचार और लापरवाही के विरुद्ध सख्त कार्रवाई तथा मामलों की व्यक्तिगत निगरानी के कारण पुलिसिंग में व्यापक सुधार देखने को मिला। उनकी कार्यशैली को “सुलभ और संवादात्मक पुलिसिंग” के सफल मॉडल के रूप में देखा गया।
इसके बाद वे आतंकवाद निरोधी दस्ता (ATS) के डीआईजी तथा गृह विभाग में विशेष सचिव जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे। कोविड-19 प्रबंधन के दौरान बिहार सरकार में विशेष सचिव (गृह विभाग) के रूप में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कर्तव्यनिष्ठा और ईमानदार कार्यशैली के लिए उन्हें कई प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया गया, जिनमें वर्ष 2019 में द्वारा प्रदान किया गया “सतेंद्र दुबे मेमोरियल अवार्ड” विशेष रूप से उल्लेखनीय है।
पुलिस सेवा के अतिरिक्त विकास वैभव सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में भी सक्रिय रहे हैं। भारतीय इतिहास, संस्कृति और विरासत पर उनके व्याख्यान युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से भी वे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विषयों पर नियमित रूप से लेखन करते रहे हैं।
मार्च 2021 में उन्होंने “आइये, मिलकर प्रेरित करें बिहार” अर्थात अभियान की शुरुआत की। शिक्षा, समता और उद्यमिता को केंद्र में रखकर शुरू हुआ यह अभियान आज व्यापक जनसमर्थन प्राप्त कर चुका है। वर्तमान में इससे लगभग 3.60 लाख सदस्य जुड़े हुए हैं तथा बिहार सहित देश-विदेश में इसके 1000 से अधिक अध्याय सक्रिय हैं।
अभियान के अंतर्गत “युवा संवाद”, “नमस्ते बिहार”, “बिहार @ 2047 विजन कॉन्क्लेव” और स्टार्टअप समिट जैसे कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। “गार्गी अध्याय” के माध्यम से बिहार के कई जिलों में निःशुल्क शिक्षा केंद्र संचालित किए जा रहे हैं, जहाँ आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को शिक्षा प्रदान की जाती है। महिलाओं की सामाजिक भागीदारी और नेतृत्व को बढ़ावा देने में भी यह अभियान सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
वर्तमान में विकास वैभव सोशल मीडिया पर भी अत्यंत लोकप्रिय हैं। फेसबुक, एक्स (पूर्व में ट्विटर) और इंस्टाग्राम पर लाखों लोग उनसे जुड़े हुए हैं। भारतीय इतिहास, संस्कृति, प्रेरणादायक विचारों और सामाजिक विषयों पर उनके नियमित संवाद के कारण युवाओं के बीच उनकी विशेष पहचान बनी हुई है। भारतीय इतिहास एवं संस्कृति, आतंकवाद अध्ययन, ऐतिहासिक स्थलों की यात्राएँ तथा शोधपरक लेखन उनकी प्रमुख अभिरुचियाँ हैं।

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