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नौहट्टा- चार महीने तक लाखों लीटर पानी बहता रहा, अधिकारी बने रहे मूकदर्शक; आखिरकार ग्रामीणों ने खुद ही कर दी नल-जल पाइप की मरम्मतl

 


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संवाददाता:मुकेश कुमार मिश्रा/नौहट्टा/रोहतास:

रोहतास जिले के नौहट्टा प्रखंड अंतर्गत उल्लीबनाही पंचायत के बलभद्रपुर गांव में मुख्यमंत्री नल-जल योजना की बदहाल स्थिति एक बार फिर सामने आई है। पिछले लगभग चार महीने से पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने के कारण प्रतिदिन हजारों लीटर पानी बर्बाद हो रहा था। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार संबंधित विभाग और अधिकारियों को शिकायत देने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं किया गया। आखिरकार परेशान होकर गांव के लोगों ने स्वयं चंदा और श्रमदान कर क्षतिग्रस्त पाइप की मरम्मत कर दी।
ग्रामीणों ने बताया कि पानी की लगातार बर्बादी से सरकार को आर्थिक नुकसान तो हो ही रहा था, साथ ही आसपास के लोगों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। कई बार विभागीय अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों तथा संबंधित कर्मियों को इसकी जानकारी दी गई, लेकिन किसी ने मौके पर पहुंचकर समस्या का समाधान करना उचित नहीं समझा।
ग्रामीण बिट्टू सिंह ने कहा कि पहले शिकायतों पर अधिकारियों की कार्रवाई काफी तेज होती थी, लेकिन अब बार-बार शिकायत करने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। वहीं रासबिहारी सिंह ने आरोप लगाया कि बीडीओ, सीओ तथा अन्य जनप्रतिनिधि भी इसी रास्ते से गुजरते हैं, लेकिन किसी ने इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया।
अरुण सिंह ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि जनता को ही अपने पैसे और श्रम से सरकारी योजनाओं की मरम्मत करनी पड़े, तो फिर संबंधित विभाग के अधिकारी और कर्मचारी वेतन किस बात का लेते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति सरकारी व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है।
ग्रामीण हृदय आनंद सिंह ने बताया कि उन्होंने भी कई बार शिकायत की, लेकिन कोई अधिकारी पाइपलाइन की मरम्मत कराने नहीं पहुंचा। वहीं दशरथ सिंह ने कहा कि यदि समय रहते ऐसी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो सरकार के करोड़ों रुपये की योजनाएं धीरे-धीरे बर्बाद होती जाएंगी।
ग्रामीण टुनटुन सिंह, दशरथ सिंह सहित गांव के अन्य लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि मुख्यमंत्री नल-जल योजना की नियमित निगरानी कराई जाए, दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए तथा भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो, ताकि सरकारी धन और पेयजल की बर्बादी रोकी जा सके।
ग्रामीणों में इस मामले को लेकर भारी आक्रोश देखा गया। उनका कहना है कि यदि समय पर विभाग कार्रवाई करता, तो न केवल लाखों लीटर पानी बचाया जा सकता था, बल्कि लोगों को स्वयं पाइप की मरम्मत करने की नौबत भी नहीं आती।

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