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मनीष कुमार/दरिहट/रोहतास:
दरिहट में आयोजित 11 दिवसीय श्रीराम महायज्ञ के दौरान गुरुवार की संध्या मानस सेविका निशी दीदी ने रामकथा का रसपान कराते हुए कहा कि मानव शरीर का राजा विवेक होता है। यदि विवेक जागृत रहता है तो व्यक्ति सही और गलत का निर्णय कर सकता है तथा उसका जीवन सद्मार्ग पर चलता है। उन्होंने कहा कि विवेक के दस सिपाही हैं— ब्रह्मचर्य, संयम, धीरज, धर्म, ज्ञान, विज्ञान, सदाचार, जप, योग और वैराग्य। यही गुण मनुष्य के जीवन को सफल और सार्थक बनाते हैं।
रामकथा के दौरान निशी दीदी ने पौराणिक प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि ताड़कासुर के अत्याचारों से देवता और प्रजा अत्यंत परेशान थे। उसके आतंक से तीनों लोकों में अशांति का वातावरण व्याप्त हो गया था। ताड़कासुर के वध के लिए देवताओं ने विचार-विमर्श किया और समाधान के रूप में भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह को आवश्यक माना, क्योंकि शिवशक्ति से उत्पन्न संतान ही ताड़कासुर का वध कर सकती थी।
उन्होंने कहा कि उस समय भगवान शिव गहन तपस्या और ध्यान में लीन थे। देवताओं ने कामदेव से आग्रह किया कि वे भगवान शिव की ध्यानावस्था भंग करें, ताकि वे तपस्या से बाहर निकलें और पार्वती से उनका विवाह संपन्न हो सके। देवताओं के अनुरोध पर कामदेव ने अपने प्रभाव से तीनों लोकों में कामुकता का संचार कर दिया। इसके प्रभाव से लोगों का विवेक कमजोर पड़ने लगा और विवेक के दसों सिपाही—ब्रह्मचर्य, संयम, धैर्य, धर्म, ज्ञान, विज्ञान, सदाचार, जप, योग एवं वैराग्य—क्षीण होने लगे।
कथा को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने बताया कि कामदेव ने अपना पुष्पबाण भगवान शिव पर चला दिया, जिससे उनकी ध्यानावस्था भंग हो गई। ध्यान भंग होने पर भगवान शिव अत्यंत क्रोधित हो उठे और उन्होंने अपना तीसरा नेत्र खोल दिया। तीसरे नेत्र की ज्वाला से कामदेव भस्म हो गए। इस प्रसंग के माध्यम से निशी दीदी ने संदेश दिया कि जब मनुष्य अपने विवेक को खो देता है तो उसके जीवन में अनेक प्रकार की समस्याएं उत्पन्न होती हैं।
उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान करते हुए कहा कि यदि जीवन को सफल, शांतिपूर्ण और आदर्श बनाना है तो विवेक के दसों सिपाहियों के नियमों का पालन करना आवश्यक है। ब्रह्मचर्य, संयम, धर्म, ज्ञान, योग और वैराग्य जैसे गुण व्यक्ति को आत्मिक उन्नति के साथ-साथ सामाजिक सम्मान भी दिलाते हैं।
यज्ञ समिति के सदस्यों ने बताया कि दरिहट में चल रहे इस 11 दिवसीय महायज्ञ में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर कथा एवं धार्मिक अनुष्ठानों का लाभ उठा रहे हैं। कार्यक्रम के अनुसार 10 जून को रामकथा का समापन होगा, जबकि 11 जून को पूर्णाहुति एवं विशाल भंडारे के साथ महायज्ञ का विधिवत समापन किया जाएगा। श्रद्धालुओं में कार्यक्रम को लेकर विशेष उत्साह और भक्ति का माहौल बना हुआ है।

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