तहलका आवाज | विशेष रिपोर्ट
पटना/भोजपुर: भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र में हुए भरत भूषण तिवारी के कथित एनकाउंटर मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। बिहार मानवाधिकार आयोग ने मामले का संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और भोजपुर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) से तथ्यात्मक जांच रिपोर्ट तलब की है। आयोग ने संबंधित अधिकारियों को लगभग चार सप्ताह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को निर्धारित की गई है।
आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ए. एम. बदर ने उपलब्ध दस्तावेजों और शिकायत के आधार पर संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। आयोग का कहना है कि जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद पूरे मामले की समीक्षा की जाएगी और आवश्यकतानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
आत्मसमर्पण के बाद गोली मारने का आरोप
मानवाधिकार मामलों के अधिवक्ता एस. के. झा ने बिहार मानवाधिकार आयोग में दायर शिकायत में आरोप लगाया है कि शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव निवासी काशीनाथ तिवारी के पुत्र भरत भूषण तिवारी ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था। इसके बावजूद पुलिस ने उन्हें गोली मार दी, जिससे उनकी मौत हो गई।
शिकायत में इस घटना को कथित फर्जी एनकाउंटर बताते हुए इसे मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन बताया गया है। अधिवक्ता ने आयोग से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
रिपोर्ट मिलने के बाद होगी समीक्षा
राज्य मानवाधिकार आयोग के रजिस्ट्रार एवं सेवानिवृत्त जिला जज शैलेंद्र सिंह के अनुसार, संबंधित अधिकारियों से मांगी गई रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद आयोग पूरे मामले का परीक्षण करेगा। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता या मानवाधिकार उल्लंघन के तथ्य सामने आते हैं, तो आयोग कानून के अनुरूप आगे की कार्रवाई करेगा।
सरकार ने भी कराया न्यायिक जांच का फैसला
भरत भूषण तिवारी की मौत को लेकर बढ़ते विवाद और लगातार उठ रहे सवालों के बीच बिहार सरकार ने भी न्यायिक जांच कराने का निर्णय लिया है। सरकार ने इस मामले की जांच हाईकोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश से कराने का फैसला किया है, ताकि घटना के सभी पहलुओं की स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित हो सके।
सरकार की ओर से कहा गया है कि जांच का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि पुलिस मुठभेड़ किन परिस्थितियों में हुई और क्या पूरी कार्रवाई कानून के अनुरूप थी।
17 जून की घटना के बाद लगातार बढ़ा विवाद
17 जून को भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र में हुई पुलिस मुठभेड़ में भरत भूषण तिवारी की मौत के बाद से मामला लगातार चर्चा में है। परिजन और समर्थक इसे फर्जी एनकाउंटर बताते हुए न्याय की मांग कर रहे हैं, जबकि पुलिस का पक्ष अलग रहा है। इस बीच मानवाधिकार आयोग द्वारा रिपोर्ट तलब किए जाने और सरकार द्वारा न्यायिक जांच की घोषणा के बाद मामले की निष्पक्ष जांच की उम्मीद और बढ़ गई है।
अब सबकी नजर 13 जुलाई पर
बिहार मानवाधिकार आयोग ने संबंधित अधिकारियों को चार सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। 13 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई में आयोग रिपोर्ट की समीक्षा करेगा। वहीं, सरकार की न्यायिक जांच भी इस मामले की सच्चाई सामने लाने में अहम मानी जा रही है। ऐसे में भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामला अब कानूनी और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गया है।

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