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रवि प्रकाश दुबे/नौहट्टा/रोहतास:
नौहट्टा प्रखण्ड के तिउरा पंचायत के अंतर्गत पड़रिया ग्राम के वार्ड संख्या-4 में मनरेगा योजना के तहत नदी की सफाई का कार्य कराया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि नदी की सफाई के बावजूद लगभग 2000 मीटर आगे कुछ लोगों द्वारा नदी के प्राकृतिक रास्ते को भरकर खेती की जा रही है, जिससे बरसात के दिनों में जल निकासी बाधित हो जाती है और किसानों की सैकड़ों बीघा फसल बर्बाद हो जाती है।
ग्रामीण मुकेश कुमार मिश्रा ने बताया कि पहाड़ी क्षेत्रों से आने वाला वर्षा का पानी पड़रिया होते हुए एक छोटे नदी-नाले के माध्यम से सोन नदी में जाकर मिलता है। लेकिन सोन नदी की ओर जाने वाले इस जलमार्ग पर बाल-पंचर क्षेत्र में कुछ लोगों द्वारा अतिक्रमण कर नदी के मुहाने को बांध दिया जाता है। इसके कारण पानी का बहाव रुक जाता है और आसपास की रैयती भूमि में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।
उन्होंने बताया कि हर वर्ष मनरेगा के तहत नदी की सफाई तो कराई जाती है, लेकिन आगे जाकर नदी के रास्ते पर किए गए अतिक्रमण के कारण सफाई का अपेक्षित लाभ किसानों को नहीं मिल पाता। जल निकासी बाधित होने से लगभग 100 बीघा भूमि में लगी धान की फसल पानी में डूबकर गल जाती है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
ग्रामीणों के अनुसार भगवान मिश्रा, वीरेंद्र मिश्रा, उपेंद्र नाथ मिश्रा, रविरंजन मिश्रा, बिंकतेश मिश्रा, सतनारायण मिश्रा सहित कई किसानों की फसल हर वर्ष जलभराव के कारण प्रभावित होती है। किसानों का कहना है कि संबंधित भूमि रैयती खाते की है और वे नियमित रूप से खेती करते हैं, लेकिन नदी के अवरुद्ध होने से उनकी मेहनत और पूंजी दोनों बर्बाद हो जाती हैं।
मुकेश कुमार मिश्रा ने प्रशासन से मांग करते हुए कहा है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर नदी के रास्ते से अतिक्रमण हटाया जाए तथा जल निकासी की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि किसानों की फसलें सुरक्षित रह सकें और उन्हें हर वर्ष होने वाले नुकसान से राहत मिल सके।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं किया गया तो आने वाले मानसून में फिर से बड़े पैमाने पर फसल क्षति होने की आशंका है। अब किसानों की नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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