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रोहतास- नौहट्टा में 16.90 लाख की लागत से बना 'अमृत सरोवर' बदहाल! सूखते पेड़, सूखा तालाब और गायब सुविधाओं पर उठे सवालl


(नौहट्टा पंचायत के मौजा पहाड़ियां स्थित अमृत सरोवर की बदहाली बनी चर्चा का विषय, ग्रामीणों ने मनरेगा और पंचायत की कार्यशैली पर उठाए गंभीर सवाल)

खबर:Tahalka Aawaz आपकी आवाजl
चीफ एडिटर- रवि प्रकाश दुबे/नौहट्टा/रोहतास:

नौहट्टा पंचायत के अंतर्गत मौजा पहाड़ियां में डिग्री कॉलेज के समीप वर्ष 2022-23 में करीब 16,90,350 रुपये की लागत से अमृत सरोवर तालाब का निर्माण कराया गया था। इस योजना को बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में शामिल किया गया था। यहां प्रत्येक वर्ष 26 जनवरी और 15 अगस्त के अवसर पर राष्ट्रीय ध्वज भी फहराया जाता है। लेकिन आज यही अमृत सरोवर अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है और बूंद बूंद पानी केलिए तरस रहा है 
तालाब में पानी नहीं होने के कारण इसके आसपास लगाए गए हरे-भरे पेड़-पौधे सूखने की कगार पर पहुंच गए हैं। जिस स्थान को पर्यावरण संरक्षण और जल संचयन का मॉडल बनना था, वहां आज सूखा तालाब और उपेक्षा का दृश्य देखने को मिल रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अमृत सरोवर के आसपास न तो बैठने के लिए चेयर की व्यवस्था की गई है, न ही लाइट की कोई सुविधा उपलब्ध है। पेड़-पौधों की सुरक्षा के लिए भी कोई इंतजाम नहीं किया गया है। यदि यहां पर्याप्त पानी, प्रकाश और बैठने की व्यवस्था होती तो डिग्री कॉलेज में पढ़ने आने वाले छात्र-छात्राओं के लिए यह एक सुंदर पर्यटन और विश्राम स्थल बन सकता था। साथ ही दूर-दराज से आने वाले लोग भी इस स्थान का आनंद ले सकते थे।
ग्रामीणों का आरोप है कि जिस उद्देश्य से सरकार ने लाखों रुपये खर्च कर इस अमृत सरोवर का निर्माण कराया था, वह उद्देश्य धरातल पर पूरा होता नजर नहीं आ रहा है। तालाब की वर्तमान स्थिति को देखकर लोग मनरेगा विभाग के अधिकारियों, संबंधित कर्मियों तथा नौहट्टा पंचायत के मुखिया की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सरकार ने 16 लाख 90 हजार 350 रुपये की राशि खर्च की, तो फिर अमृत सरोवर आज बदहाल क्यों है? तालाब में पानी क्यों नहीं है? पेड़-पौधे सूखने की नौबत क्यों आ गई? और आखिर इस योजना की नियमित देखरेख की जिम्मेदारी किसकी है?
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और अमृत सरोवर को फिर से उसकी मूल पहचान दिलाने के लिए तत्काल आवश्यक कदम उठाए जाएं।
तहलका आवाज इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाता रहेगा और प्रशासन से जवाब मांगता रहेगा कि आखिर लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद अमृत सरोवर अपनी बदहाली पर क्यों आंसू बहा रहा है?

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