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निजी स्कूलों में अभिभावकों का शोषण जारी, री-एडमिशन, महंगी किताबों और ड्रेस के नाम पर वसूली के आरोप


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चीफ एडिटर- रवि प्रकाश दुबे/सासाराम (रोहतास) : 

नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही जिले के निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जिला मुख्यालय सासाराम सहित विभिन्न अनुमंडल और प्रखंडों से अभिभावकों के आर्थिक शोषण की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।

अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन द्वारा री-एडमिशन के नाम पर अतिरिक्त शुल्क वसूला जा रहा है। इसके साथ ही कॉपी-किताब और ड्रेस खरीदने के लिए भी दबाव बनाया जा रहा है।

बताया जा रहा है कि कई स्कूलों ने अभिभावकों को केवल निर्धारित दुकानों से ही सामान खरीदने के लिए बाध्य कर रखा है, जहां कीमतें सामान्य बाजार की तुलना में काफी अधिक हैं। हर साल नई किताबें और नई ड्रेस लेने की मजबूरी ने मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ा दिया है।

15 अप्रैल के बाद ही क्यों होता है विरोध?

इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यह उठ रहा है कि निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ आवाज उठाने वाले सामाजिक संगठन फिलहाल खामोश क्यों हैं।

सूत्रों के अनुसार, हर साल की तरह इस बार भी विरोध प्रदर्शन की तैयारी 15 अप्रैल के बाद की जा रही है। बुद्धिजीवियों का मानना है कि जब तक विरोध शुरू होता है, तब तक अधिकांश अभिभावक किताब, कॉपी और ड्रेस खरीदकर आर्थिक रूप से प्रभावित हो चुके होते हैं।

संगठनों की भूमिका पर उठ रहे सवाल

कुछ लोगों का यह भी आरोप है कि विरोध में देरी के पीछे संगठनों की निष्क्रियता या अन्य कारण हो सकते हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस मुद्दे को लेकर जिले में चर्चा तेज है।

समय रहते कार्रवाई की मांग

बुद्धिजीवियों का कहना है कि यदि वास्तव में अभिभावकों के हित में काम करना है तो फरवरी-मार्च से ही इस मुद्दे को उठाना चाहिए, ताकि प्रशासन समय रहते हस्तक्षेप कर सके।

अब देखना यह होगा कि जिलाधिकारी रोहतास इस मामले में कब संज्ञान लेते हैं और निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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