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संवदाता- मुकेश कुमार मिश्रा/नौहट्टा/रोहतास:
(गुरु-शिष्य परंपरा का दिया संदेश, त्रिदंडी स्वामी के तैलचित्र का हुआ पूजन; सैकड़ों श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया महाप्रसाद)
नौहट्टा प्रखंड के सोन नदी तट स्थित ऐतिहासिक मनोहर घाट पर आषाढ़ पूर्णिमा (गुरु पूर्णिमा) के पावन अवसर पर श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। त्रिदंडी स्वामी के परम शिष्य जगदीशाचार्य जी महाराज के सानिध्य में उनके आवास पर विशेष धार्मिक अनुष्ठान का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर क्षेत्र सहित दूर-दराज से पहुंचे सैकड़ों श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना, हवन, आरती और गुरु पूजन में भाग लेकर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया।
प्रातःकाल से ही मनोहर घाट स्थित आश्रम परिसर में श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। पूरे परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार और भक्ति गीतों से वातावरण भक्तिमय हो उठा। विद्वान आचार्यों द्वारा विधि-विधान के साथ भगवान का पूजन, हवन एवं आरती संपन्न कराई गई। धार्मिक अनुष्ठान के बाद श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद एवं विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें सभी ने श्रद्धापूर्वक प्रसाद ग्रहण किया।
इस अवसर पर जगदीशाचार्य जी महाराज ने अपने पूज्य गुरुदेव त्रिदंडी स्वामी जी महाराज के तैलचित्र का वैदिक रीति-रिवाज से पूजन एवं माल्यार्पण किया। उन्होंने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि गुरु ही जीवन के अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश प्रदान करते हैं। गुरु की कृपा से ही व्यक्ति का आध्यात्मिक, नैतिक और सामाजिक विकास संभव होता है। भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर गुरु-शिष्य परंपरा को आगे बढ़ाना प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है।
आयोजकों ने बताया कि मनोहर घाट पर यह धार्मिक आयोजन प्रत्येक वर्ष आषाढ़ पूर्णिमा के अवसर पर नियमित रूप से आयोजित किया जाता है। पूजा, हवन, गुरु पूजन एवं भंडारा इस आयोजन की प्रमुख विशेषताएं हैं। इस अवसर पर आसपास के गांवों के अलावा अन्य जिलों एवं राज्यों से भी श्रद्धालु पहुंचकर गुरु का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
कार्यक्रम को सफल बनाने में मनोज माली एवं उनके पुत्र अमल की विशेष भूमिका रही। दोनों ने श्रद्धालुओं के स्वागत, भंडारे की व्यवस्था तथा समस्त आयोजन को सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
इस धार्मिक आयोजन में नौहट्टा के मुखिया प्रतिनिधि सत्येंद्र दुबे, मनोज माली, टाटा से आए शीतल सिंह, समाजसेवी संतोष कुमार दुबे (बुची दुबे), छोटे सिंह काशी से, सुशील सिंह बारी से, नेहा दुबे (टाटा) सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गुरुजनों का आशीर्वाद प्राप्त कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति और मानव कल्याण की कामना की।
धार्मिक अनुष्ठान के शांतिपूर्ण एवं सफल समापन पर श्रद्धालुओं ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज में आध्यात्मिक चेतना, सामाजिक एकता और भारतीय संस्कृति के संरक्षण का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। सभी श्रद्धालुओं ने अगले वर्ष भी इसी श्रद्धा और उत्साह के साथ गुरु पूर्णिमा महोत्सव में शामिल होने का संकल्प लिया।

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