(खेतों के बीच से होकर स्कूल जाने को मजबूर छात्र-छात्राएं, बरसात में बढ़ जाती है परेशानी; भवन, शौचालय और चहारदीवारी की समस्या भी बनी चुनौती)
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संवादाता - मुकेश कुमार मिश्रा नौहट्टा (रोहतास)।
नौहट्टा प्रखंड की तिउरा पंचायत स्थित प्राथमिक विद्यालय, काटूदार आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है। विद्यालय तक पहुंचने के लिए न तो पक्की सड़क है और न ही कोई वैकल्पिक सुगम मार्ग। ऐसे में छोटे-छोटे बच्चे, शिक्षक और अभिभावक रोजाना खेतों के बीच बनी संकरी पगडंडी से होकर विद्यालय पहुंचने को विवश हैं। बरसात के मौसम में यह रास्ता कीचड़ और जलजमाव से भर जाता है, जिससे बच्चों के लिए विद्यालय पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं रहता।
विद्यालय तक पहुंचने के दौरान कई बार खेतों से होकर गुजरने को लेकर किसानों और राहगीरों के बीच विवाद की स्थिति भी उत्पन्न हो जाती है। इससे बच्चों की सुरक्षा और नियमित उपस्थिति दोनों प्रभावित हो रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि शिक्षा के अधिकार की बात तो की जाती है, लेकिन विद्यालय तक पहुंचने के लिए सुरक्षित रास्ता तक उपलब्ध नहीं कराया गया है।
विद्यालय के प्रधानाध्यापक मुकेश पासवान ने बताया कि विद्यालय तक जाने के लिए उचित रास्ता नहीं होने की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। इस संबंध में प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को कई बार लिखित आवेदन दिया गया है। उन्होंने बताया कि 16 फरवरी 2026 तथा 17 जून 2026 को भी विभाग को पत्र भेजकर समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने कहा कि बरसात के दिनों में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। बच्चे कीचड़ और फिसलन भरे रास्ते से होकर स्कूल पहुंचते हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। कई अभिभावक भी खराब रास्ते के कारण अपने बच्चों को विद्यालय भेजने से हिचकते हैं।
विद्यालय की समस्याएं केवल रास्ते तक सीमित नहीं हैं। विद्यालय भवन के तीन कमरों की छत जर्जर हो चुकी है और बारिश के दौरान लगातार पानी टपकता है। इससे कक्षाओं का संचालन प्रभावित होता है और बच्चों को सुरक्षित स्थान पर बैठाकर पढ़ाना पड़ता है। विद्यालय का शौचालय भी उपयोग योग्य स्थिति में नहीं है, जिससे विशेषकर छात्राओं को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
इसके अलावा विद्यालय की चहारदीवारी नहीं होने के कारण परिसर पूरी तरह असुरक्षित बना हुआ है। खुले परिसर में बाहरी लोगों और मवेशियों का प्रवेश बना रहता है, जिससे विद्यालय की स्वच्छता और सुरक्षा दोनों प्रभावित होती हैं।
ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि विद्यालय तक पहुंचने के लिए तत्काल सड़क या संपर्क मार्ग का निर्माण कराया जाए। साथ ही जर्जर भवन की मरम्मत, शौचालय को उपयोगी बनाया जाए तथा विद्यालय की चहारदीवारी का निर्माण कर बच्चों को सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराया जाए।
स्थानीय लोगों ने शिक्षा विभाग एवं जिला प्रशासन से मांग की है कि अधिकारियों की एक टीम भेजकर विद्यालय का स्थल निरीक्षण कराया जाए और सभी समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाए।

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