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नौहट्टा- सावन के प्रथम दिन महादेवखोह में भाजपा नेता श्रीराम सिंह ने किया महादेव की पूजा अर्चना, क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामनाl


(परिवार के साथ भोलेनाथ का किया जलाभिषेक, मंदिर व्यवस्था में हरसंभव सहयोग का दिया भरोसा) 

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संवदाता- मुकेश कुमार मिश्रा/नौहट्टा/रोहतास:

सावन माह के प्रथम सोमवार की शुरुआत के साथ ही नौहट्टा प्रखंड स्थित प्रसिद्ध धार्मिक स्थल महादेवखोह में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। इस पावन अवसर पर भाजपा के पूर्व प्रखंड अध्यक्ष एवं सामाजिक कार्यकर्ता श्रीराम सिंह ने अपने पूरे परिवार के साथ भगवान भोलेनाथ का विधि-विधान से पूजन, और जलाभिषेक किया। उन्होंने क्षेत्र में सुख, शांति, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना करते हुए भगवान शिव से सभी लोगों के जीवन में मंगल की प्रार्थना की।

पूजन के उपरांत महादेवखोह मंदिर के संचालक राधासुत सिन्हा ने श्रीराम सिंह को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया। इस दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।

इस अवसर पर श्रीराम सिंह ने कहा कि महादेवखोह धाम आस्था, श्रद्धा और आध्यात्मिक शांति का प्रमुख केंद्र है। यहां आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को अद्भुत आत्मिक शांति का अनुभव होता है। उन्होंने कहा कि सावन के पूरे महीने में यहां दूर-दूर से हजारों श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन एवं जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा और मंदिर की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए उनसे जो भी सहयोग अपेक्षित होगा, उसे वे पूरी निष्ठा के साथ करने का प्रयास करेंगे।

सावन माह प्रारंभ होते ही नौहट्टा प्रखंड के महादेवखोह सहित विभिन्न शिवालयों और देवालयों में श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार बढ़ रही है। सुबह से ही श्रद्धालु जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, भांग, पुष्प एवं अन्य पूजन सामग्री के साथ भगवान शिव का जलाभिषेक कर परिवार की सुख-शांति, आरोग्यता और समृद्धि की कामना कर रहे हैं।

हिंदू धर्म में सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र और पुण्यदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार समुद्र मंथन के समय निकले विषैले हलाहल विष को भगवान शिव ने संपूर्ण सृष्टि की रक्षा के लिए अपने कंठ में धारण किया था। इसी कारण वे नीलकंठ के नाम से विख्यात हुए। विष की उष्णता को शांत करने के लिए देवताओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक किया था। तभी से सावन माह में जल अर्पित करने की परंपरा चली आ रही है।

शिव पुराण में भी सावन के महीने में भगवान शिव के जलाभिषेक एवं रुद्राभिषेक का विशेष महत्व बताया गया है। शास्त्रों के अनुसार इस पवित्र माह में शिवलिंग पर जल, दूध, दही, घी, शहद एवं बेलपत्र अर्पित करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा करने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा उत्तम संतान, धन, ऐश्वर्य, आरोग्य एवं सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

सावन के प्रथम दिन महादेवखोह में श्रद्धालुओं की उमड़ी आस्था ने एक बार फिर इस प्राचीन शिवधाम की धार्मिक महत्ता को रेखांकित किया। पूरे दिन मंदिर परिसर में भक्तों का तांता लगा रहा और हर-हर महादेव के उद्घोष से वातावरण शिवमय बना रहा।

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