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अयोध्या- राम मंदिर चढ़ावा गबन मामला: दान का पैसा आखिर गया कहां? जमीन, बैंक खाते, गहने और संपत्तियों की मनी ट्रेल खंगाल रही पुलिस


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विशेष संवादाता- अयोध्या/उत्तर प्रदेश:

अयोध्या मंदिर चढ़ावा गबन मामले की जांच अब निर्णायक चरण में पहुंच गई है। जांच एजेंसियां अब केवल आरोपियों से पूछताछ तक सीमित नहीं हैं, बल्कि श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए करोड़ों रुपये के दान की पूरी मनी ट्रेल (Money Trail) खंगालने में जुटी हैं। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित तौर पर गबन की गई रकम का इस्तेमाल आखिर कहां-कहां किया गया। जांच का फोकस अब जमीन की खरीद-फरोख्त, बैंक खातों में जमा रकम, सोने-चांदी के गहनों, महंगे वाहनों और अन्य चल-अचल संपत्तियों पर है।

मुख्य आरोपी रामशंकर उर्फ टिन्नू यादव और उसके भतीजे मनीष यादव की 39 घंटे की पुलिस रिमांड पूरी होने के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। हालांकि इस दौरान हुई लंबी पूछताछ ने जांच एजेंसियों को कई अहम सुराग दिए हैं, जिनके आधार पर अब कार्रवाई का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है।

39 घंटे तक चली गहन पूछताछ

सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने दोनों आरोपियों से अलग-अलग कई चरणों में पूछताछ की। पूछताछ के दौरान उनके सामने बैंक रिकॉर्ड, संपत्ति से जुड़े दस्तावेज, डिजिटल साक्ष्य और अन्य वित्तीय दस्तावेज रखे गए। जांच अधिकारियों ने उनकी आय के स्रोत, पिछले कुछ वर्षों में खरीदी गई संपत्तियों, बैंक लेनदेन और निवेश का पूरा ब्योरा मांगा।

पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि कहीं मंदिर के चढ़ावे की रकम को जमीन खरीदने, बैंक खातों में जमा करने, सोने-चांदी के आभूषण खरीदने या अन्य संपत्तियों में निवेश तो नहीं किया गया।

बाइक और कार भी हुई बरामद

रिमांड के दौरान पुलिस ने टिन्नू यादव की निशानदेही पर एक मोटरसाइकिल और एक कार बरामद की है। अब इन वाहनों की खरीद से जुड़े दस्तावेजों और भुगतान के स्रोत की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों को संदेह है कि इनकी खरीद में कथित गबन की रकम का इस्तेमाल किया गया हो सकता है।

दान पेटियों से गिनती केंद्र तक की पूरी प्रक्रिया जांच के घेरे में

जांच केवल संपत्तियों तक सीमित नहीं है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि मंदिर में आने वाले चढ़ावे की गिनती किस प्रकार होती थी, दान पेटियां किस प्रक्रिया से गिनती केंद्र तक पहुंचाई जाती थीं और पूरे सिस्टम में किस व्यक्ति की क्या भूमिका थी।

सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ के दौरान दोनों आरोपियों ने नकदी गिनने की प्रक्रिया से जुड़े कई अन्य लोगों के नाम भी बताए हैं। अब उन लोगों को भी पूछताछ के लिए बुलाए जाने की संभावना है।

पहले भी कई लोगों से हो चुकी है पूछताछ

इस मामले में पुलिस पहले ही कई अन्य आरोपियों और संदिग्धों से पूछताछ कर चुकी है। इनमें सह-आरोपी अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, करुणेश पांडेय, सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी सुभाष चंद्र श्रीवास्तव तथा दान पेटियों के परिवहन की जिम्मेदारी संभालने वाले रामशंकर मिश्रा शामिल हैं।

जांच के दौरान पुलिस पहले ही दो एसयूवी वाहन, नकदी, सोने के गहने तथा निवेश से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद कर चुकी है।

बैंक खाते भी जांच एजेंसियों के रडार पर

सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियों ने आरोपियों और उनके परिजनों से जुड़े कई बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है। इन खातों के जरिए हुए लेनदेन की बारीकी से जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कथित गबन की राशि को अलग-अलग खातों, निवेश योजनाओं या संपत्तियों में तो नहीं लगाया गया।

जांच अधिकारी अब वित्तीय लेनदेन की पूरी श्रृंखला जोड़ने में लगे हैं। उनका मानना है कि बैंक रिकॉर्ड, संपत्ति के दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्यों की जांच से इस मामले में कई और बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं।

जांच जारी, सामने आ सकते हैं नए नाम

पुलिस का कहना है कि मनी ट्रेल की जांच पूरी होने के बाद इस मामले में कुछ और लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है। यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता के प्रमाण मिलते हैं तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल राम मंदिर चढ़ावा गबन मामला श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा होने के कारण बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। जांच एजेंसियां हर पहलू की गहन पड़ताल कर रही हैं ताकि यह स्पष्ट हो सके कि दान की राशि का कथित दुरुपयोग किस प्रकार और किन-किन लोगों की मिलीभगत से किया गया।

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