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नौहट्टा - पर्याप्त बारिश नहीं होने से धान की रोपनी प्रभावित, सूखने की कगार पर पहुंचा बिचड़ा; किसानों में बढ़ी सुखाड़ की चिंताl


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संवादाता - मुकेश कुमार मिश्रा/नौहट्टा/रोहतास:

रोहतास जिले के नौहट्टा प्रखंड में लगातार पर्याप्त वर्षा नहीं होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। खेतों में तैयार धान का बिचड़ा (नर्सरी) अब सूखने के कगार पर पहुंच गया है। किसानों का कहना है कि यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो पूरे प्रखंड में खेती बुरी तरह प्रभावित होगी और लगभग 70 से 75 प्रतिशत क्षेत्र में अकाल जैसी स्थिति उत्पन्न होने की आशंका है।

बीते सप्ताह हुई हल्की बारिश से किसानों को कुछ राहत मिली थी। उस समय धान के बिचड़े में नई जान आ गई थी और किसानों को उम्मीद जगी थी कि अब रोपनी का कार्य समय पर शुरू हो जाएगा। लेकिन उसके बाद लगातार तेज धूप और बारिश नहीं होने से खेतों की नमी पूरी तरह खत्म होने लगी है। धान की नर्सरी धीरे-धीरे सूख रही है और किसानों की मेहनत पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

जिन किसानों के पास मोटर पंप की सुविधा है, वे भी राहत महसूस नहीं कर पा रहे हैं। भूजल स्तर काफी नीचे चले जाने के कारण मोटर पंप से पर्याप्त पानी नहीं निकल रहा है। इससे खेतों की सिंचाई प्रभावित हो रही है और धान के बिचड़े को बचाना किसानों के लिए चुनौती बन गया है।

प्रखंड के दक्षिणी हिस्से में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर बताई जा रही है। वहां जलस्तर ठीक होने के कारण कई किसानों ने खेतों में कीचड़ तैयार कर रखा है और अच्छी बारिश होते ही धान की रोपनी शुरू होने की उम्मीद है। लेकिन नौहट्टा के उत्तर एवं पहाड़ी क्षेत्रों में जलस्तर तेजी से गिरने के कारण सूखे की आशंका लगातार गहराती जा रही है। यदि यही स्थिति बनी रही तो धान की खेती पर गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।

किसानों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में अच्छी वर्षा नहीं हुई तो न केवल धान की फसल प्रभावित होगी, बल्कि इसका असर पूरे क्षेत्र की कृषि व्यवस्था और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। खेती पर निर्भर हजारों परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो सकता है।

किसानों ने बयां किया दर्दl

किसान शशिकांत दुबे ने बताया कि धान का बिचड़ा अब काफी बड़ा हो गया है, लेकिन मोटर पंप भी पर्याप्त पानी नहीं दे पा रहा है। किसी तरह बिचड़े को बचाने की कोशिश की जा रही है। यदि जल्द बारिश नहीं हुई तो पूरी मेहनत बेकार हो जाएगी।

वहीं किसान अजय कुमार दुबे ने कहा कि धान का बिचड़ा पूरी तरह तैयार है, लेकिन मोटर पंप का जलस्तर नीचे चले जाने के कारण रोपनी शुरू नहीं हो पा रही है। अब केवल अच्छी बारिश का इंतजार है।

किसान बैद्यनाथ दुबे ने चिंता जताते हुए कहा कि यदि भूजल स्तर इसी तरह गिरता रहा तो आने वाले दिनों में धान की रोपाई करना बेहद मुश्किल हो जाएगा। 

इस संबंध में प्रखंड कृषि नोडल समन्वयक रितेश कुमार ने बताया कि नौहट्टा प्रखंड में अब तक लगभग 30 प्रतिशत क्षेत्र में ही धान की रोपनी हो सकी है। उन्होंने कहा कि शेष क्षेत्रों में किसान पर्याप्त वर्षा का इंतजार कर रहे हैं। यदि जल्द अच्छी बारिश होती है तो रोपनी में तेजी आएगी, अन्यथा खरीफ फसल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

कृषि विशेषज्ञों का भी मानना है कि धान की रोपाई के लिए जुलाई का अंतिम सप्ताह अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में यदि समय रहते पर्याप्त वर्षा नहीं हुई तो किसानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है और क्षेत्र में कृषि उत्पादन भी प्रभावित होगा। फिलहाल नौहट्टा प्रखंड के हजारों किसान अच्छी बारिश की आस लगाए आसमान की ओर उम्मीद भरी निगाहों से देख रहे हैं।

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