(छपरा में बीडीओ पर हुए हमले के विरोध में बिहारभर के अधिकारियों का आंदोलन, नौहट्टा में भी दिखी एकजुटता)
Tahalka Aawaz | आपकी आवाज
संवाददाता : मुकेश कुमार मिश्रानौ/नौहट्टा/रोहतास:
छपरा में विधि-व्यवस्था ड्यूटी के दौरान प्रखंड विकास पदाधिकारियों (बीडीओ) पर हुए हमले के विरोध में सोमवार को नौहट्टा प्रखंड की प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) मनोरमा कुमारी ने हाथ पर काली पट्टी बांधकर कार्यालय पहुंचकर सांकेतिक विरोध दर्ज कराया। यह विरोध बिहार ग्रामीण विकास सेवा संघ के आह्वान पर अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित कराने की मांग को लेकर किया गया।
बीडीओ मनोरमा कुमारी ने निर्धारित समय पर कार्यालय पहुंचकर अपने सभी प्रशासनिक एवं जनहित से जुड़े कार्यों का नियमित रूप से निष्पादन किया। हालांकि उन्होंने हाथ पर काली पट्टी बांधकर यह संदेश दिया कि प्रशासनिक अधिकारियों की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है, जितनी आम जनता की सुरक्षा। विरोध के बावजूद कार्यालय का कार्य पूरी तरह सामान्य रूप से संचालित होता रहा और आम लोगों के कार्यों का निष्पादन भी किया गया।
दरअसल, हाल ही में छपरा में विधि-व्यवस्था ड्यूटी के दौरान दो प्रखंड विकास पदाधिकारियों पर हमला हुआ था, जिसमें दोनों अधिकारी गंभीर रूप से घायल हो गए। इस घटना ने राज्यभर के प्रशासनिक अधिकारियों में चिंता पैदा कर दी है। घटना के बाद बिहार ग्रामीण विकास सेवा संघ ने राज्य सरकार से अधिकारियों की सुरक्षा के लिए ठोस एवं प्रभावी व्यवस्था करने की मांग उठाई है।
संघ ने मांग की है कि फील्ड ड्यूटी के दौरान अधिकारियों को पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए, प्रशिक्षित सुरक्षा कर्मियों की तैनाती सुनिश्चित हो, आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए जाएं तथा ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई की जाए। इन मांगों के समर्थन में राज्य के सभी जिलों में बीडीओ और अन्य अधिकारी काली पट्टी बांधकर सांकेतिक विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
नौहट्टा की बीडीओ मनोरमा कुमारी ने कहा कि यह विरोध किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित कराने की मांग को लेकर है। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार बिहार ग्रामीण विकास सेवा संघ की मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती और अधिकारियों की सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था नहीं करती, तब तक चरणबद्ध आंदोलन जारी रहेगा।
उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकारी दिन-रात जनता की सेवा में लगे रहते हैं। ऐसे में फील्ड ड्यूटी के दौरान उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए, ताकि अधिकारी बिना किसी भय के अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर सकें।
इस सांकेतिक विरोध के माध्यम से नौहट्टा प्रखंड कार्यालय से भी राज्य सरकार को स्पष्ट संदेश दिया गया कि प्रशासनिक अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर अब ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाने की आवश्यकता है। बिहार ग्रामीण विकास सेवा संघ ने भी चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर उचित निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

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