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मनीष कुमार/संझौली/रोहतास:
रोहतास जिले के सतर बिगहवा में हुए दर्दनाक सड़क हादसे ने संझौली प्रखंड के उदयपुर गांव के एक परिवार की खुशियां छीन लीं। हादसे में जान गंवाने वाले सुशील कुमार अपने परिवार के एकमात्र कमाऊ सदस्य थे। उनकी असमय मौत से पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है और परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
मिली जानकारी के अनुसार, सुशील कुमार अपने वृद्ध पिता, पत्नी और दो छोटे बच्चों का सहारा थे। परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी पूरी तरह उनके कंधों पर थी। उनकी मेहनत और कमाई से ही घर का चूल्हा जलता था। लेकिन सड़क हादसे में हुई उनकी मौत ने परिवार को गहरे संकट में डाल दिया है।
ग्रामीणों ने बताया कि करीब दस वर्ष पूर्व बीमारी के कारण सुशील के बड़े भाई की भी मौत हो गई थी। उस समय से ही वृद्ध पिता की सारी उम्मीदें सुशील पर टिकी थीं। वह अपने बूढ़े पिता का सहारा और परिवार की रीढ़ थे। अब उनकी मौत के बाद परिवार के सामने भविष्य की चिंता खड़ी हो गई है।
हादसे की खबर जैसे ही उदयपुर गांव पहुंची, पूरे गांव में मातम छा गया। सुशील की पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है। वह बार-बार अपने पति को याद कर बेहोश हो जा रही थीं। वहीं दोनों छोटे बच्चे अभी यह भी नहीं समझ पा रहे हैं कि उनके पिता अब कभी वापस नहीं लौटेंगे।
सबसे भावुक क्षण उस समय देखने को मिला जब अंतिम संस्कार के दौरान सुशील के पांच वर्षीय मासूम बेटे ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। हर कोई इस दर्दनाक मंजर को देखकर भावुक हो उठा। गांव के बुजुर्गों और महिलाओं की आंखों से भी आंसू छलक पड़े।
ग्रामीणों का कहना है कि सुशील एक मेहनती, मिलनसार और जिम्मेदार व्यक्ति थे। उनकी असमय मौत से सिर्फ उनका परिवार ही नहीं, बल्कि पूरा गांव स्तब्ध है। लोगों ने प्रशासन से पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की मांग की है, ताकि परिवार को इस कठिन समय में कुछ राहत मिल सके।
सुशील कुमार की मौत ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और तेज रफ्तार वाहनों के खतरे पर सवाल खड़े कर दिए हैं। गांव में हर तरफ इसी घटना की चर्चा है और लोग शोकाकुल परिवार को ढांढस बंधाने पहुंच रहे हैं। उदयपुर गांव में आज भी मातम पसरा हुआ है और हर आंख नम है।

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