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नौहट्टा- जीवित बुजुर्ग सरकारी रिकॉर्ड में 'मृत', महीनों से बंद पड़ी पेंशन; कल्याण शिविर में फूटा आक्रोशl


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मुकेश कुमार मिश्रा/नौहट्टा/रोहतास:

नौहट्टा में बड़ी संख्या में वृद्ध, विधवा और दिव्यांग लाभुक पहुंचे, रिकॉर्ड सुधार और पेंशन बहाल करने की उठी मांगl

नौहट्टा प्रखंड में सरकारी रिकॉर्ड की एक बड़ी त्रुटि ने दर्जनों बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगों के सामने आजीविका का संकट खड़ा कर दिया है। मुख्यमंत्री प्रखंड सहयोग सह जन कल्याण शिविर के दूसरे दिन गुरुवार को बीआरसी भवन परिसर में बड़ी संख्या में सामाजिक सुरक्षा पेंशनधारी अपनी बंद पड़ी पेंशन को लेकर पहुंचे। कई लाभुकों ने अधिकारियों के सामने दर्द बयां करते हुए कहा कि वे पूरी तरह जीवित हैं, लेकिन सरकारी अभिलेखों में उन्हें मृत दर्ज कर दिया गया है। इसी वजह से महीनों से उनकी सामाजिक सुरक्षा पेंशन बंद है।

शिविर में पहुंचे हरिहर सिंह, राजमुनि कुंवर, विश्वनाथ सिंह और पियरिया देवी सहित कई लाभुकों ने अधिकारियों को आवेदन सौंपकर बताया कि रिकॉर्ड की एक गलती के कारण उन्हें लगातार आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना था कि वृद्धावस्था, विधवा और दिव्यांग पेंशन ही उनके जीवनयापन का प्रमुख सहारा है। पेंशन बंद होने के बाद दवा, इलाज और दैनिक जरूरतों का खर्च उठाना भी मुश्किल हो गया है।

लाभुकों ने बताया कि वे कई महीनों से प्रखंड कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका। कल्याण शिविर में भी बड़ी संख्या में ऐसे लोग पहुंचे जिनकी शिकायत एक जैसी थी—वे जीवित हैं, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित होने के कारण उनकी पेंशन रोक दी गई है। इस दौरान कई बुजुर्गों ने अधिकारियों से जल्द से जल्द रिकॉर्ड में सुधार कर पेंशन बहाल करने की मांग की।

प्रखंड विकास पदाधिकारी मनोरमा कुमारी ने लाभुकों की शिकायतें सुनने के बाद बताया कि शिविर में प्राप्त सभी आवेदनों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि अब तक लगभग 150 मामलों में रिकॉर्ड सुधार की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और संबंधित लाभुकों को जल्द ही सामाजिक सुरक्षा पेंशन का लाभ मिलने लगेगा।

बीडीओ ने बताया कि अधिकांश मामलों में समस्या बायोमेट्रिक जीवंत सत्यापन (Liveness Verification) नहीं होने के कारण उत्पन्न हुई है। जिन लाभुकों का अंगूठा या आंख के माध्यम से बायोमेट्रिक सत्यापन नहीं हो पाया, उनके रिकॉर्ड में तकनीकी समस्या आ गई, जिससे कई लोगों की पेंशन प्रभावित हुई।

उन्होंने कहा कि जिन लाभुकों का बायोमेट्रिक सत्यापन अंगूठे या आंख के माध्यम से नहीं हो पा रहा है, वे एक आवेदन के साथ प्रखंड कार्यालय में संपर्क करें। आवेदन की जांच के बाद उनका जीवंत सत्यापन कराकर रिकॉर्ड अपडेट किया जाएगा, ताकि उनकी बंद पड़ी पेंशन दोबारा शुरू कराई जा सके।

शिविर में मौजूद कई लाभुकों ने प्रशासन से मांग की कि रिकॉर्ड सुधार की प्रक्रिया को और तेज किया जाए तथा भविष्य में ऐसी तकनीकी त्रुटियों से बचने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए। उनका कहना था कि सरकारी रिकॉर्ड की एक गलती का खामियाजा गरीब और असहाय लोगों को भुगतना पड़ रहा है, जिनके लिए पेंशन ही सम्मानपूर्वक जीवन जीने का एकमात्र सहारा है।

कल्याण शिविर में बड़ी संख्या में पहुंचे पेंशनधारियों की भीड़ ने यह स्पष्ट कर दिया कि सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में रिकॉर्ड संबंधी त्रुटियां अब एक गंभीर प्रशासनिक चुनौती बन चुकी हैं। अब लाभुकों की निगाहें प्रशासन द्वारा किए जाने वाले सुधारात्मक कदमों और पेंशन बहाली की प्रक्रिया पर टिकी हैं।

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