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रवि प्रकाश दुबे/नौहट्टा/रोहतास:
नौहट्टा,प्रखंड क्षेत्र में शनिवार को श्रद्धा, आस्था और पारंपरिक उत्साह के साथ वट सावित्री पूजा संपन्न हुई। इस अवसर पर सुबह से ही विभिन्न गांवों के वट वृक्षों के पास सुहागिन महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। महिलाओं ने निर्जला व्रत रखकर अपने पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की।
वट सावित्री पूजा को लेकर सुहागिन महिलाओं ने तीन दिनों पहले से ही तैयारी शुरू कर दी थी। महिलाएं पूजा सामग्री जुटाने, फलाहार और पारंपरिक अनुष्ठानों में व्यस्त रहीं। शनिवार की सुबह करीब तीन बजे ही महिलाएं सज-धज कर वट वृक्षों के नीचे पहुंच गईं, जहां विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की गई।
महिलाओं ने वट वृक्ष की पूजा कर सत्यवान-सावित्री एवं यमराज की कथा सुनी। इसके बाद कच्चा सूत लेकर वट वृक्ष की 108 बार परिक्रमा की और अपने पति की दीर्घायु की कामना की। पूजा के उपरांत महिलाओं ने दान-पुण्य भी किया।
दोपहर बाद महिलाओं ने घर लौटकर पहले अपने-अपने पति को शर्बत पिलाया, फिर स्वयं शर्बत ग्रहण कर व्रत खोला। कई महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाज के अनुसार अपने पति को बेना से हवा देकर उनके स्वस्थ एवं दीर्घ जीवन की मंगलकामना की।
आचार्य ललका बाबा और पंडित सुरेश शास्त्री ने बताया कि सुहागिन महिलाओं के लिए तीन दिवसीय वट सावित्री पूजा का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी दिन माता सावित्री ने यमराज से तर्क-वितर्क कर अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे।
प्रखंड के यदुनाथपुर, नावाडीह, परछा, पंडुका, नौहट्टा, तिउरा, शाहपुर, दारानगर, भदारा, आनंदीचक उल्ली-बनाही और टीपा सहित पहाड़ी क्षेत्रों के दर्जनों गांवों में वट सावित्री पूजा श्रद्धापूर्वक मनाई गई। पूजा को लेकर पूरे क्षेत्र में धार्मिक माहौल बना रहा।

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