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विशेष संवदाता- सांगली (महाराष्ट्र)
महाराष्ट्र के सांगली जिले से एक बेहद संवेदनशील और झकझोर देने वाले मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। चार वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म और उसकी हत्या के मामले में दोषी पड़ोसी पांडुरंग को अदालत ने मृत्युदंड (फांसी की सजा) सुनाई है। फास्ट ट्रैक कोर्ट ने पुलिस की त्वरित जांच, फोरेंसिक साक्ष्यों और गवाहों के बयानों को आधार बनाते हुए आरोपी को दोषी करार दिया।
यह दिल दहला देने वाली घटना 6 फरवरी 2025 को सांगली जिले के जत तालुका के एक गांव में हुई थी। मासूम बच्ची अपनी चचेरी बहन के साथ घर के सामने पेड़ के नीचे खेल रही थी। कुछ देर बाद उसकी बहन घर लौट गई, जबकि बच्ची वहीं रह गई। इसी दौरान पड़ोस में रहने वाला आरोपी उसे बहला-फुसलाकर अपने घर ले गया।
अभियोजन के अनुसार, आरोपी ने बच्ची के साथ दुष्कर्म किया और पहचान छिपाने के उद्देश्य से उसकी हत्या कर दी। वारदात के बाद उसने शव को एक बोरे में भरकर लोहे के बक्से में छिपा दिया, ताकि किसी को घटना की भनक न लगे।
जब बच्ची काफी देर तक घर नहीं लौटी तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। काफी खोजबीन के बाद भी उसका पता नहीं चला तो पुलिस को सूचना दी गई। जांच के दौरान गांव के कुछ लोगों ने पुलिस को बताया कि बच्ची को आखिरी बार आरोपी के साथ देखा गया था। इस सूचना के आधार पर पुलिस ने आरोपी के घर की तलाशी ली, जहां लोहे के बक्से से बच्ची का शव बरामद हुआ। इसके बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया।
उमदी पुलिस थाने की टीम ने मामले की जांच तेजी से पूरी करते हुए सिर्फ 13 दिनों के भीतर अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी। इसके बाद फास्ट ट्रैक कोर्ट में लगातार सुनवाई चली। अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने मजबूत परिस्थितिजन्य साक्ष्य, फोरेंसिक रिपोर्ट और प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के बयान प्रस्तुत किए।
सभी साक्ष्यों और गवाहों के बयानों पर विचार करने के बाद जिला एवं सत्र न्यायालय ने आरोपी पांडुरंग को दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई। घटना के लगभग डेढ़ साल बाद आए इस फैसले को पीड़ित परिवार और समाज के लिए न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
पीड़िता के परिजनों ने अदालत के फैसले पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी मासूम बेटी के साथ हुई हैवानियत की भरपाई कभी नहीं हो सकती, लेकिन दोषी को मिली कड़ी सजा से उन्हें न्याय मिलने का एहसास हुआ है। उन्होंने सरकार से मृत्युदंड के फैसले को जल्द से जल्द लागू करने की मांग भी की है।

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